तब, अब पुस्तकों का सारांश कैसे लिखें। वैसे हम कविता करते तो थे, पर उन्हें लिखें कहां? राजबंदियों को साप्ताहिक व्याख्यानों में दिए अर्थशास्त्र, इतिहास आदि मुख्य विषयों के नोट्स देकर उनसे याद करा लेने का कार्य कैसे हो? इतने कागज कहां से लाएं? और लाएं भी तो संभाले और छिपाए कैसे जाएं? छुपाया तो भी पढ़ने के समय अधिकारी देखेंगे, उन्हें अंधेरे में कैसे रखा जाए? तभी सामने की दीवार पर दृष्टि गई और युक्ति दिखी। अरे, यही तो कागज है! चूने से पुती लंबी-चैड़ी यह दीवार!
तब, अब पुस्तकों का सारांश कैसे लिखें। वैसे हम कविता करते तो थे, पर उन्हें लिखें कहां? राजबंदियों को साप्ताहिक व्याख्यानों में दिए अर्थशास्त्र, इतिहास आदि मुख्य विषयों के नोट्स देकर उनसे याद करा लेने का कार्य कैसे हो? इतने कागज कहां से लाएं? और लाएं भी तो संभाले और छिपाए कैसे जाएं? छुपाया तो भी पढ़ने के समय अधिकारी देखेंगे, उन्हें अंधेरे में कैसे रखा जाए? तभी सामने की दीवार पर दृष्टि गई और युक्ति दिखी। अरे, यही तो कागज है! चूने से पुती लंबी-चैड़ी यह दीवार!