पुती दीवार और रामबाॅंस का कांटा
पीछे बंबई में भायखला में छोटी सी कील या ईंट के टुकड़े से मैं भित्तिा पर लिखा करता। परंतु वह प्रयोग अधूरा था, अब वह बड़े पैमाने पर करने की योजना बनाई और मेरी संपूर्ण शक्ति तक, भरपूर चैदह वर्षों तक वह काम में आई। एक दिन चुपचाप दरवाजे की कुंडी में खोंसना और कोठरी का दरवाजा बंद होते ही प्रायः वह महीनों बंद ही रहता, भीत पर स्तंभों के साथ लिखना प्रारंभ किया। इस सातवें कक्ष की सभी दीवारें स्वयं
पुती दीवार और रामबाॅंस का कांटा
पीछे बंबई में भायखला में छोटी सी कील या ईंट के टुकड़े से मैं भित्तिा पर लिखा करता। परंतु वह प्रयोग अधूरा था, अब वह बड़े पैमाने पर करने की योजना बनाई और मेरी संपूर्ण शक्ति तक, भरपूर चैदह वर्षों तक वह काम में आई। एक दिन चुपचाप दरवाजे की कुंडी में खोंसना और कोठरी का दरवाजा बंद होते ही प्रायः वह महीनों बंद ही रहता, भीत पर स्तंभों के साथ लिखना प्रारंभ किया। इस सातवें कक्ष की सभी दीवारें स्वयं