एक-एक गं्रथ ही थी। मैं रस्सी बटता उस दीवार पर स्पेंसर की अज्ञेय मीमांसा का युक्तिवाद यथाक्रम उतारता गया था। ‘कमला’ प्रायः उस सातवें भाग की दीवार पर रचा गया था और एक कोठरी में मिल के अर्थशास्त्रीय गं्रथ की सभी महत्तवपूर्ण व्याख्याएं कील से खोदी गई थी। वह इसलिए की प्रत्येक महीने जब मेरी कोठरी की बदली होती तब कुछ-न-कुछ तिकड़मबाजी कर दूसरे कक्ष से आनेवाले नए राजबंदियों में से, जिसे अर्थशास्त्र का अध्ययन करना हो, वह मेरी छोड़ी
एक-एक गं्रथ ही थी। मैं रस्सी बटता उस दीवार पर स्पेंसर की अज्ञेय मीमांसा का युक्तिवाद यथाक्रम उतारता गया था। ‘कमला’ प्रायः उस सातवें भाग की दीवार पर रचा गया था और एक कोठरी में मिल के अर्थशास्त्रीय गं्रथ की सभी महत्तवपूर्ण व्याख्याएं कील से खोदी गई थी। वह इसलिए की प्रत्येक महीने जब मेरी कोठरी की बदली होती तब कुछ-न-कुछ तिकड़मबाजी कर दूसरे कक्ष से आनेवाले नए राजबंदियों में से, जिसे अर्थशास्त्र का अध्ययन करना हो, वह मेरी छोड़ी