कंठस्थ करना पड़ता। यद्यपि भित्तिा-पत्रों की आयु वर्ष भर की होती, तथापि चूना पोतने से एक अन्य लाभ होता। पुराने कागजों का विनाश होता और चूना पोतने से दीवार पुनः शुभ्र होती और नए कोरे-कोरे कागजों का जन्म होता। कभी-कभी इस कांड का भंडा भी फूट जाता। परंतु अत्यल्प, क्यांेकि उस भीत्तिा पर की गई बारीक खुदाई पढ़ना एक विशेष कला ही थी। उसमें मराठी भाषा अथवा अर्थशास्त्रादि गूढ़ विषयों की टिप्पणियां। उसे बारी साहब पढ़ पाएं और उसका अर्थ लगा पाएं-उनकी योग्यता तो इस तरह की क्षुद्र,
कंठस्थ करना पड़ता। यद्यपि भित्तिा-पत्रों की आयु वर्ष भर की होती, तथापि चूना पोतने से एक अन्य लाभ होता। पुराने कागजों का विनाश होता और चूना पोतने से दीवार पुनः शुभ्र होती और नए कोरे-कोरे कागजों का जन्म होता। कभी-कभी इस कांड का भंडा भी फूट जाता। परंतु अत्यल्प, क्यांेकि उस भीत्तिा पर की गई बारीक खुदाई पढ़ना एक विशेष कला ही थी। उसमें मराठी भाषा अथवा अर्थशास्त्रादि गूढ़ विषयों की टिप्पणियां। उसे बारी साहब पढ़ पाएं और उसका अर्थ लगा पाएं-उनकी योग्यता तो इस तरह की क्षुद्र,