मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

तुच्छ बातें समझने से कहीं अधिक ऊंची थी! इतनी कि जब-जब दीवार कुरेदने का संदेह किसी पर होता तब यह न समझ पाने पर कि यह घसीटकर क्या लिखा है, बारी साहब सच्चाई के साथ आरोप लगाते, ‘जान-बूझकर दीवार का चूना कुरेदकर उन्हें विरूप किया गया है, ताकि सरकारी वास्तु की खराबी हो।’ एक बार हमारे ज्येष्ठ बंधु को रामबाॅंस का कांटा अपने पास रखने के अपराध में दंड दिया गया था। परंतु रामबाॅंस के काॅंटों से ही उन्होंने विवेकानंद की पुस्तक की वेदांत


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तुच्छ बातें समझने से कहीं अधिक ऊंची थी! इतनी कि जब-जब दीवार कुरेदने का संदेह किसी पर होता तब यह न समझ पाने पर कि यह घसीटकर क्या लिखा है, बारी साहब सच्चाई के साथ आरोप लगाते, ‘जान-बूझकर दीवार का चूना कुरेदकर उन्हें विरूप किया गया है, ताकि सरकारी वास्तु की खराबी हो।’ एक बार हमारे ज्येष्ठ बंधु को रामबाॅंस का कांटा अपने पास रखने के अपराध में दंड दिया गया था। परंतु रामबाॅंस के काॅंटों से ही उन्होंने विवेकानंद की पुस्तक की वेदांत


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