उनसे सर्वथा असंभव होने के कारण राज्य व्यवस्था में अंधेरखाता खुल गया। अतः शासनशास्त्रीय ज्ञान को खीरा-ककड़ी नहीं समझना चाहिए। इस कार्य में आपको उनका आदर्श सामने रखकर चलना चाहिए जिन्हें उदारमतवादी कहा गया है। उदारमतवादियों में जिस तरह अर्थविद् राजनीतिज्ञ, शासनशास्त्री हैं उसी तरह आप लोगों में कम-से-कम गोखले अथवा दत्त अथवा सर माधवराव कहां है? अतः कम-से-कम जब तक प्रत्यक्ष कार्य कुछ भी न करने की इस असहाय अथवा बद्व अवस्था में आप हैं,
उनसे सर्वथा असंभव होने के कारण राज्य व्यवस्था में अंधेरखाता खुल गया। अतः शासनशास्त्रीय ज्ञान को खीरा-ककड़ी नहीं समझना चाहिए। इस कार्य में आपको उनका आदर्श सामने रखकर चलना चाहिए जिन्हें उदारमतवादी कहा गया है। उदारमतवादियों में जिस तरह अर्थविद् राजनीतिज्ञ, शासनशास्त्री हैं उसी तरह आप लोगों में कम-से-कम गोखले अथवा दत्त अथवा सर माधवराव कहां है? अतः कम-से-कम जब तक प्रत्यक्ष कार्य कुछ भी न करने की इस असहाय अथवा बद्व अवस्था में आप हैं,