कर्म ही समाज के लिए हितकारक होगा। आप इस समय एक सेवा-त्याग की यातना सहने की निष्क्रिय सवेवा कर ही रहे हैं। उसके साथ-साथ ही आपमें से प्रत्येक अपने-अपने सामने यह तात्कालिक लक्ष्य रखे कि वह एकल सेवा करते-करते ही अंगीकृत कार्यार्थ आवश्यक विद्वता का भी यथासंभव उर्पाजन करे और इस प्रकार मात्र वीरदृष्टि से कार्य करने की जो एकल योग्यता इससे पूर्व आप में थी, उसमें अब ज्ञानदृष्टि भी जोड़कर दोहरी योग्यता आत्मसात् करे।
प्रकरण-13
कर्म ही समाज के लिए हितकारक होगा। आप इस समय एक सेवा-त्याग की यातना सहने की निष्क्रिय सवेवा कर ही रहे हैं। उसके साथ-साथ ही आपमें से प्रत्येक अपने-अपने सामने यह तात्कालिक लक्ष्य रखे कि वह एकल सेवा करते-करते ही अंगीकृत कार्यार्थ आवश्यक विद्वता का भी यथासंभव उर्पाजन करे और इस प्रकार मात्र वीरदृष्टि से कार्य करने की जो एकल योग्यता इससे पूर्व आप में थी, उसमें अब ज्ञानदृष्टि भी जोड़कर दोहरी योग्यता आत्मसात् करे।
प्रकरण-13