मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



हिंदुस्थान से पत्र-व्यवहार और समाचार-प्राप्ति

हिंदुस्थान की जेल में न रखते हुए राजबंदियों को कालेपानी भेजे जाने पर उन्हें जो सबसे बड़ी पीड़ा भुगतनी पड़ती, वह थी- उनका हिंदुस्थान से संबंध टूट जाना। हिंदुस्थान स्थित कारागृह मंे कम-से-कम प्रति तीन-चार महीनों में एक बार तो अपने संबंधियों से भेंट होती ही है, पत्र प्राप्त होते हैं और यदि कुछ विशेष कष्ट हो तो प्रायः प्रत्यक्ष ही उन पुराने बंदियों के हाथों, जो मुक्त हो जाते हैं,


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हिंदुस्थान से पत्र-व्यवहार और समाचार-प्राप्ति

हिंदुस्थान की जेल में न रखते हुए राजबंदियों को कालेपानी भेजे जाने पर उन्हें जो सबसे बड़ी पीड़ा भुगतनी पड़ती, वह थी- उनका हिंदुस्थान से संबंध टूट जाना। हिंदुस्थान स्थित कारागृह मंे कम-से-कम प्रति तीन-चार महीनों में एक बार तो अपने संबंधियों से भेंट होती ही है, पत्र प्राप्त होते हैं और यदि कुछ विशेष कष्ट हो तो प्रायः प्रत्यक्ष ही उन पुराने बंदियों के हाथों, जो मुक्त हो जाते हैं,


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