उस कष्ट का बाहर भेज सकते हैं, उसे मुखर कर सकते हैं। पुनः आते-जाते बाहर के लोग कारागारीय मंडल के रूप में यह निरीक्षण करने आते ही रहते हैं कि काराबंदियों की स्थिति कैसी है। इन सभी बातों का हिंदुस्थानी कारागृह में भी उस समय यद्यपि इतना उपयोग नहीं होता था जितना होना चाहिए, तथापि अंदमान की तुलना में हिंदुस्थान में सार्वजनिक दृष्टि की रश्मियां कारागृह के अंधेरे में अधिक तीव्रतापूर्वक तथा अधिक सुलभता के साथ घुस जाती थी। परंतु
उस कष्ट का बाहर भेज सकते हैं, उसे मुखर कर सकते हैं। पुनः आते-जाते बाहर के लोग कारागारीय मंडल के रूप में यह निरीक्षण करने आते ही रहते हैं कि काराबंदियों की स्थिति कैसी है। इन सभी बातों का हिंदुस्थानी कारागृह में भी उस समय यद्यपि इतना उपयोग नहीं होता था जितना होना चाहिए, तथापि अंदमान की तुलना में हिंदुस्थान में सार्वजनिक दृष्टि की रश्मियां कारागृह के अंधेरे में अधिक तीव्रतापूर्वक तथा अधिक सुलभता के साथ घुस जाती थी। परंतु