इनमें से एक भी लाभ अंदमान में नहीं मिलता थां वहां के दस-पांच यूरोपीय अधिकारी-केवल, एक मजिस्टेªट, एक डाॅक्टर, एक सुपरिंटेंडेंट और एक उस मंडल का, जो उनके विभागों पर निगरानी रखने के लिए नियुक्त किया जाता, वह अदल-बदलकर वही सभासद बनते। उसी तरह सायंकालीन क्रीड़ामंडल के मित्र, सहभोजी दिन के परस्परावलंबी राज्य विभागाधिकारी तथा रात्रि के गाने-बजाने-नाचने के साथी भी । अतःउनमें से किसी के भी विरूद्व कुछ शिकायत कोई दूसरा सुनेगा, इसकी आशा न होना स्वााभाविक ही था।
इनमें से एक भी लाभ अंदमान में नहीं मिलता थां वहां के दस-पांच यूरोपीय अधिकारी-केवल, एक मजिस्टेªट, एक डाॅक्टर, एक सुपरिंटेंडेंट और एक उस मंडल का, जो उनके विभागों पर निगरानी रखने के लिए नियुक्त किया जाता, वह अदल-बदलकर वही सभासद बनते। उसी तरह सायंकालीन क्रीड़ामंडल के मित्र, सहभोजी दिन के परस्परावलंबी राज्य विभागाधिकारी तथा रात्रि के गाने-बजाने-नाचने के साथी भी । अतःउनमें से किसी के भी विरूद्व कुछ शिकायत कोई दूसरा सुनेगा, इसकी आशा न होना स्वााभाविक ही था।