कहीं नहीं गए। उसमें भी अंदमान के उपनिवेश में रहकर, जीवित रहकर! फिर मुक्त होना है। सर्वथा विरला, कदाचित्। फिर हिंदुस्थान में!
शिकायत प्रकट कैसे करें
ऐसी अवस्था में राजबंदियों के सामने यह प्रश्न खड़ा हुआ था कि अपनी पीड़ा अपने देशबंधुओं क कानों तक कैसे पहंुचाएं? वहां के अधिकारियों के हाथों जीवित रहकर मुक्त होने के लिए एकमात्र उपाय था- जिस असह्म कष्ट में रहना पड़ता था उसकी, कुछ अंश में ही क्यों न हो, भनक हिंदुस्थान सरकार के कानों में डालना,
कहीं नहीं गए। उसमें भी अंदमान के उपनिवेश में रहकर, जीवित रहकर! फिर मुक्त होना है। सर्वथा विरला, कदाचित्। फिर हिंदुस्थान में!
शिकायत प्रकट कैसे करें
ऐसी अवस्था में राजबंदियों के सामने यह प्रश्न खड़ा हुआ था कि अपनी पीड़ा अपने देशबंधुओं क कानों तक कैसे पहंुचाएं? वहां के अधिकारियों के हाथों जीवित रहकर मुक्त होने के लिए एकमात्र उपाय था- जिस असह्म कष्ट में रहना पड़ता था उसकी, कुछ अंश में ही क्यों न हो, भनक हिंदुस्थान सरकार के कानों में डालना,