निर्णय लेते। परंतु यदि कभी उनके निर्णय में किसी को अन्याय का आभास हुआ तो उसको ऊपर तक पहुंचाना या चुगली खाना अथवा सार्वजनिक रूप में उसको प्रकट करना हिंदुस्थान की तुलना मं अंदमान में बहुत कठिन कार्य हो गया था।
अब हमेशा ही मुक्त होनेवाले बंदियों के द्वारा बाहर समाचार भेजने का जो हिंदुस्थानी कारागृहों में साधन था, उसका तो अंदमान मंे नाम भी नहीं ले सकते थे। जो आएगा वह बीस-पच्चीस वर्षों के लिए । अर्थात् कम-से-कम दस वर्ष तो
निर्णय लेते। परंतु यदि कभी उनके निर्णय में किसी को अन्याय का आभास हुआ तो उसको ऊपर तक पहुंचाना या चुगली खाना अथवा सार्वजनिक रूप में उसको प्रकट करना हिंदुस्थान की तुलना मं अंदमान में बहुत कठिन कार्य हो गया था।
अब हमेशा ही मुक्त होनेवाले बंदियों के द्वारा बाहर समाचार भेजने का जो हिंदुस्थानी कारागृहों में साधन था, उसका तो अंदमान मंे नाम भी नहीं ले सकते थे। जो आएगा वह बीस-पच्चीस वर्षों के लिए । अर्थात् कम-से-कम दस वर्ष तो