के पश्चात् ही अंदमान से थोड़ा नाममात्र का परिचय हुआ। परंतु साधारण जनता को ही नहीं, प्रायः सभी पत्रकारों को भी अंदमान विषयक मात्र सालाना ‘सब ठीक है’ के आगे कष्ट के बारे में कोई भी पूछताछ हिंदुस्थान के अधिकारियों को नहीं करनी चाहिए और बहुत से लोगोें की यही इच्छा होगी कि राजबंदियों को एक बार उस कालेपानी पर छोड़ दें तो पुनः उनकी किटकिट सुनने की आवश्यकता नहीं है।
परंतु उन सब प्रतिकूल परिस्थितियों में भी राजबंदियों ने अपनी
के पश्चात् ही अंदमान से थोड़ा नाममात्र का परिचय हुआ। परंतु साधारण जनता को ही नहीं, प्रायः सभी पत्रकारों को भी अंदमान विषयक मात्र सालाना ‘सब ठीक है’ के आगे कष्ट के बारे में कोई भी पूछताछ हिंदुस्थान के अधिकारियों को नहीं करनी चाहिए और बहुत से लोगोें की यही इच्छा होगी कि राजबंदियों को एक बार उस कालेपानी पर छोड़ दें तो पुनः उनकी किटकिट सुनने की आवश्यकता नहीं है।
परंतु उन सब प्रतिकूल परिस्थितियों में भी राजबंदियों ने अपनी