उस किटकिट को हिंदुस्थान सरकार के कानों में डालने की योजना बनाई। यदि मुक्ति पानी है, कम-से-कम जीवित रहना है, तो अब यह किए बिना बचना असंभव था। यह सब ठीक, परंतु बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे? इन राजबंदियों में एक सज्जन श्री होतीलाल थे
जो संयुक्त प्रांत के न्यायलय से राजद्रोह के अपराध में दस वर्ष का दंड पाकर आए थे। उन्होंने अपने एक मित्र की सम्मति से कहा कि मैं यह दायित्व लेता हूं। उस समय तक राजबंदियों की जो हड़ताल, झगड़े हुए थे,
उस किटकिट को हिंदुस्थान सरकार के कानों में डालने की योजना बनाई। यदि मुक्ति पानी है, कम-से-कम जीवित रहना है, तो अब यह किए बिना बचना असंभव था। यह सब ठीक, परंतु बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे? इन राजबंदियों में एक सज्जन श्री होतीलाल थे
जो संयुक्त प्रांत के न्यायलय से राजद्रोह के अपराध में दस वर्ष का दंड पाकर आए थे। उन्होंने अपने एक मित्र की सम्मति से कहा कि मैं यह दायित्व लेता हूं। उस समय तक राजबंदियों की जो हड़ताल, झगड़े हुए थे,