होतीलाल का पत्र
होतीलाल ने कोल्हू की हड़ताल में बारी साहब से लेकर सुपरिंटेंडेंट तक सभी की नाक में दम कर डाला था। वे उत्तर भारतीय शुद्व हिंदी तो बोलते ही थे, परंतु अंगे्रजी, उर्दू में भी प्रवीण थे। रूस, चीन, जापान आदि सभी देश-विदेश की सैर करके उन्होंने अनेक अनुभव लिये थे। उन्हें तो सर्वथा ‘असुधारणीय’ घोषित करते हुए एक कोठरी में कड़े पहरे में रखा गया था। उस कोठरी में और उस पहरे में उन्होंने एक-एक पंक्ति करके यह तीन स्तंभों
होतीलाल का पत्र
होतीलाल ने कोल्हू की हड़ताल में बारी साहब से लेकर सुपरिंटेंडेंट तक सभी की नाक में दम कर डाला था। वे उत्तर भारतीय शुद्व हिंदी तो बोलते ही थे, परंतु अंगे्रजी, उर्दू में भी प्रवीण थे। रूस, चीन, जापान आदि सभी देश-विदेश की सैर करके उन्होंने अनेक अनुभव लिये थे। उन्हें तो सर्वथा ‘असुधारणीय’ घोषित करते हुए एक कोठरी में कड़े पहरे में रखा गया था। उस कोठरी में और उस पहरे में उन्होंने एक-एक पंक्ति करके यह तीन स्तंभों