का पत्र पूरा किया था। उनके एक-दो विश्वसनीय मित्रों को छोड़कर अन्य राजबंदियों को इसमें से एक अक्षर भी ज्ञात नहीं था। एक दिन प्रातःकाल के समय वह पत्र, जिसमें कारागार के राजबंदियों पर हो रहे अत्याचारों तथा बारी साहब आदि के व्यवहार का विस्तृत वर्णन था, होती बाबू ने न केवल अपने हस्ताक्षर के साथ प्रत्युत उस कड़े पहरे में स्थित अपनी कोठरी का क्रमांक भी नीचे लिखकर बंदियों के बाहर काम करने के लिए जाने की धांधली में किसी के हाथों
का पत्र पूरा किया था। उनके एक-दो विश्वसनीय मित्रों को छोड़कर अन्य राजबंदियों को इसमें से एक अक्षर भी ज्ञात नहीं था। एक दिन प्रातःकाल के समय वह पत्र, जिसमें कारागार के राजबंदियों पर हो रहे अत्याचारों तथा बारी साहब आदि के व्यवहार का विस्तृत वर्णन था, होती बाबू ने न केवल अपने हस्ताक्षर के साथ प्रत्युत उस कड़े पहरे में स्थित अपनी कोठरी का क्रमांक भी नीचे लिखकर बंदियों के बाहर काम करने के लिए जाने की धांधली में किसी के हाथों