बाहर भेज दिया। परंतु कारागृह के बाहर भेजने का अर्थ एकदम बाहर तो नहीं, जैसे हिंदुस्थान के कारागार में था। उस पत्र को अंदमान के पार जाना था, जो स्वयं ही एक प्रचंड कारागार था। उधर भी एक सरकारी विश्वासपात्र यात्री के लिफाफे में चोरी-छिपे वह पत्र कलकत्ता में उतरा और सुरंेद्रनाथ तक पहुंच गया। ऐसे दिनों में, जबकि क्रांतिकारियों का नाम तक लेने में बड़े-बड़े अतिरथी, महारथी थर-थर कांपते थे, तब उन्हांेने वह पत्र ‘बंगाली’¹ नामक अपने
बाहर भेज दिया। परंतु कारागृह के बाहर भेजने का अर्थ एकदम बाहर तो नहीं, जैसे हिंदुस्थान के कारागार में था। उस पत्र को अंदमान के पार जाना था, जो स्वयं ही एक प्रचंड कारागार था। उधर भी एक सरकारी विश्वासपात्र यात्री के लिफाफे में चोरी-छिपे वह पत्र कलकत्ता में उतरा और सुरंेद्रनाथ तक पहुंच गया। ऐसे दिनों में, जबकि क्रांतिकारियों का नाम तक लेने में बड़े-बड़े अतिरथी, महारथी थर-थर कांपते थे, तब उन्हांेने वह पत्र ‘बंगाली’¹ नामक अपने