समाचार-पत्र में प्रकाशित किया। इतना ही नहीं अपितु उस पर अपनी संपादकीय टिप्पणी भी लिखी। वह पत्र ‘बंगाली’ में प्रकाशित होते ही अन्य पत्रकारों को भी उसकी ओट में छिपकर थोड़ा-बहुत लिखने का साहस हुआ। अंत में कौंसिल में भी उस संबंध में प्रश्नोत्तर रूप में चर्चा छिड़ी।
अंदमान से बाहर हिंदुस्थान में पत्र भेजना जितना कठिन था, उतना ही बाहर से और पुनः राजनीतिक कांड का समाचार हिंदुस्थान से अंदमान में लाना और हमें सूचित करना मुश्किल
समाचार-पत्र में प्रकाशित किया। इतना ही नहीं अपितु उस पर अपनी संपादकीय टिप्पणी भी लिखी। वह पत्र ‘बंगाली’ में प्रकाशित होते ही अन्य पत्रकारों को भी उसकी ओट में छिपकर थोड़ा-बहुत लिखने का साहस हुआ। अंत में कौंसिल में भी उस संबंध में प्रश्नोत्तर रूप में चर्चा छिड़ी।
अंदमान से बाहर हिंदुस्थान में पत्र भेजना जितना कठिन था, उतना ही बाहर से और पुनः राजनीतिक कांड का समाचार हिंदुस्थान से अंदमान में लाना और हमें सूचित करना मुश्किल