था। अतः इतनी तिकड़मबाजी से जो पत्र भेजा गया था, वह हिंदुस्थान पहुंचा अथवा उस व्यक्ति ने ले जाने के बहाने उसे समुद्र में फंेक दिया अथवा उससे भी आगे उसे सरकार के हाथों में ही थमा दिया- वे जो दो-तीन राजबंदी पत्र भेजने का भेद जानते थे-इस चिंता में डूबे थे कि तभी हिंदुस्थान का समाचार हमारे कानों तक पहुंचाने का डाक विभाग का कार्य स्वयं बारी साहब ने ही किया।
बारी साहब का भड़कना
एक दिन प्रातः सबकुछ ठीक-ठाक होते हुए भी बारी
था। अतः इतनी तिकड़मबाजी से जो पत्र भेजा गया था, वह हिंदुस्थान पहुंचा अथवा उस व्यक्ति ने ले जाने के बहाने उसे समुद्र में फंेक दिया अथवा उससे भी आगे उसे सरकार के हाथों में ही थमा दिया- वे जो दो-तीन राजबंदी पत्र भेजने का भेद जानते थे-इस चिंता में डूबे थे कि तभी हिंदुस्थान का समाचार हमारे कानों तक पहुंचाने का डाक विभाग का कार्य स्वयं बारी साहब ने ही किया।
बारी साहब का भड़कना
एक दिन प्रातः सबकुछ ठीक-ठाक होते हुए भी बारी