साहब कारागृह में क्रोध से लाल-पीले होते हुए आए। प्रत्येक पेटी अफसर को दस-पांच, प्रत्येक वाॅर्डर को पांच-पचास और उस बंदी को, जिसपर उनकी कृपा-दृष्टि पड़ती, अनगिनत गालियों की बौछार करते और अपना मोटा काला लट्ठ ठोंकते हुए महाशय हर विभाग में चक्कर लगाने लगे। ऐसा क्या अनर्थ हो गया? सारे बंदी सिर पीटने लगे। बारी साहब केवल दहाड़ते, ‘साला लोग! साला लोग! हम बताएंगे! त्ुम क्या बंदोबस्त रखता है! हम सबको मट्टी में मिलाएंगे!’ परंतु वह
साहब कारागृह में क्रोध से लाल-पीले होते हुए आए। प्रत्येक पेटी अफसर को दस-पांच, प्रत्येक वाॅर्डर को पांच-पचास और उस बंदी को, जिसपर उनकी कृपा-दृष्टि पड़ती, अनगिनत गालियों की बौछार करते और अपना मोटा काला लट्ठ ठोंकते हुए महाशय हर विभाग में चक्कर लगाने लगे। ऐसा क्या अनर्थ हो गया? सारे बंदी सिर पीटने लगे। बारी साहब केवल दहाड़ते, ‘साला लोग! साला लोग! हम बताएंगे! त्ुम क्या बंदोबस्त रखता है! हम सबको मट्टी में मिलाएंगे!’ परंतु वह