बैठाओ और कोई भी मनुष्य उसके आस-पास भी गया तो याद रखना। इस तरह बरसते-बरसते घोषणा करते बारी वहां से गया। जो पत्र का राज जानते थे, वे समझ गए कि पत्र अवश्य प्रकाशित हो चुका है। दो दिनों में ही बात फेल गई कि बारी ने उन भद्र राजबंदियों के सामने, जिन्हें उन्होंने अपना चमचा बनाकर रखा था, यह बात उगली कि पत्र प्रकाशित हो चुका है और उसने
इस बात की पूछताछ की कि यह पत्र भेजनेवाला कौन है। उन ‘भद्र’ बंदियों ने राजबंदियों को और एक
बैठाओ और कोई भी मनुष्य उसके आस-पास भी गया तो याद रखना। इस तरह बरसते-बरसते घोषणा करते बारी वहां से गया। जो पत्र का राज जानते थे, वे समझ गए कि पत्र अवश्य प्रकाशित हो चुका है। दो दिनों में ही बात फेल गई कि बारी ने उन भद्र राजबंदियों के सामने, जिन्हें उन्होंने अपना चमचा बनाकर रखा था, यह बात उगली कि पत्र प्रकाशित हो चुका है और उसने
इस बात की पूछताछ की कि यह पत्र भेजनेवाला कौन है। उन ‘भद्र’ बंदियों ने राजबंदियों को और एक