परंतु क्या सचमुच ही वह छापाखाना जब्त हो गया? यह समाचार कैसे प्राप्त करें? हमने पहले ही कहा है कि हिंदुस्थान में समाचार भेजना जितना कठिन था, वहां से कोई समाचार प्राप्त करना भी लगभग उतना ही कठिन था। राजबंदियों को यह जानने की तीव्र उत्कंठा थी कि अपने प्रियजन क्या करते होंगे, परंतु उससे भी अधिक तीव्र उत्कंठा उनमें से प्रायः सभी को थी कि अपने पीछ स्वदेश की क्या स्थिति है?
स्वदेशवासियों की स्थिति कैसी है
उस समय जो आंदोलन
परंतु क्या सचमुच ही वह छापाखाना जब्त हो गया? यह समाचार कैसे प्राप्त करें? हमने पहले ही कहा है कि हिंदुस्थान में समाचार भेजना जितना कठिन था, वहां से कोई समाचार प्राप्त करना भी लगभग उतना ही कठिन था। राजबंदियों को यह जानने की तीव्र उत्कंठा थी कि अपने प्रियजन क्या करते होंगे, परंतु उससे भी अधिक तीव्र उत्कंठा उनमें से प्रायः सभी को थी कि अपने पीछ स्वदेश की क्या स्थिति है?
स्वदेशवासियों की स्थिति कैसी है
उस समय जो आंदोलन