समस्त हिंदुस्थान को प्रक्षुब्ध कर रहे थे उनका जोर कितना है, अपना पक्ष प्रबल है या नहीं, सत्ता का क्रूर आघात सहने के लिए उस ढाल
के आश्रम में पनपनेवाले अन्य पक्ष कुछ कार्य कर पा रहे हैं या नहीं, आदि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार हमें कोई सूचित करेगा या नहीं? उसे जानने के क्या उपाय किए जाएं? जो राजबंदी ििमलता वह दूसरे से पहला प्रश्न यही करता, ‘स्वदेश का कुछ ताजा समाचार?’ एकाध वार्त्ता मिलते ही काम का कष्ट, भोजन की कुरूचि,
समस्त हिंदुस्थान को प्रक्षुब्ध कर रहे थे उनका जोर कितना है, अपना पक्ष प्रबल है या नहीं, सत्ता का क्रूर आघात सहने के लिए उस ढाल
के आश्रम में पनपनेवाले अन्य पक्ष कुछ कार्य कर पा रहे हैं या नहीं, आदि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार हमें कोई सूचित करेगा या नहीं? उसे जानने के क्या उपाय किए जाएं? जो राजबंदी ििमलता वह दूसरे से पहला प्रश्न यही करता, ‘स्वदेश का कुछ ताजा समाचार?’ एकाध वार्त्ता मिलते ही काम का कष्ट, भोजन की कुरूचि,