गिरता हुआ स्वास्थ्य आदि सबकुछ भूलकर राजबंदियों का युवा मंडल दो-दो या तीन-तीन का गुट बनाकर या संदेश देते लेते पूरे दिन उस वार्त्ता की चर्चा में मग्न हो जाता। स्वदेश के स्वास्थ्य एवं विकास की चिंता उनमें से प्रायः सभी को सत्य ही दिन-रात उन व्यक्तिगत कष्टों में भी आकुलित करती। प्रियतम अपनी किसी प्रिया का समाचार प्राप्त करने के लिए जितना उत्कंठित होता है, राजबंदी उससे भी अधिक अपनी उस मातृभूमि की कोई समाचार पाने के लिए आकुलित रहते,
गिरता हुआ स्वास्थ्य आदि सबकुछ भूलकर राजबंदियों का युवा मंडल दो-दो या तीन-तीन का गुट बनाकर या संदेश देते लेते पूरे दिन उस वार्त्ता की चर्चा में मग्न हो जाता। स्वदेश के स्वास्थ्य एवं विकास की चिंता उनमें से प्रायः सभी को सत्य ही दिन-रात उन व्यक्तिगत कष्टों में भी आकुलित करती। प्रियतम अपनी किसी प्रिया का समाचार प्राप्त करने के लिए जितना उत्कंठित होता है, राजबंदी उससे भी अधिक अपनी उस मातृभूमि की कोई समाचार पाने के लिए आकुलित रहते,