जिसके लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित किया था। वृत्तपत्र मिलना असंभव, घर से आने वाले पत्रों में राजनीति का एक अक्षर भी हो तो वह पत्र दिया नहीं जाता। अतः दिन-रात यही चिंता रहती कि हिंदुस्थान का समाचार कैसे प्राप्त करें।
परंतु ऐसी स्थिति में भी साधन से साधन जोड़ते हुए कुछ-न-कुछ समाचार प्राप्त करने में उन राजबंदियों ने कोई कसर उठा नहीं रखी। प्रथम साधन था- नया आनेवाला चालान। हर माह देश-निष्कासन का दंड प्राप्त साधारण पांच-पचास
जिसके लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित किया था। वृत्तपत्र मिलना असंभव, घर से आने वाले पत्रों में राजनीति का एक अक्षर भी हो तो वह पत्र दिया नहीं जाता। अतः दिन-रात यही चिंता रहती कि हिंदुस्थान का समाचार कैसे प्राप्त करें।
परंतु ऐसी स्थिति में भी साधन से साधन जोड़ते हुए कुछ-न-कुछ समाचार प्राप्त करने में उन राजबंदियों ने कोई कसर उठा नहीं रखी। प्रथम साधन था- नया आनेवाला चालान। हर माह देश-निष्कासन का दंड प्राप्त साधारण पांच-पचास