हुई तो कभी नाली में बाहर से घुसेड़ी हुई और कभी नाली में भीतर से हाथ डालकर निकाली हुई, ऐसी अनेक युक्तियों से टुकड़े जमाकर उन्हें पढ़ा जाता। इनके अतिरिक्त एक और मार्ग यह था कि किसी
अधिकारी के मुख से गलती से अथवा सहानुभूतिवश कोई समाचार निकल जाता। इस मार्ग से कभी-कभी स्वयं बारी साहब भी संवाददाता का काम कर देते थे। परंतु उनका वरदान नित्य ही अभिशापगर्भित होता था। बारी साहब ऐसे समाचार लेकर स्वयं हमारे पास मानो उपकार करने पधारते,
हुई तो कभी नाली में बाहर से घुसेड़ी हुई और कभी नाली में भीतर से हाथ डालकर निकाली हुई, ऐसी अनेक युक्तियों से टुकड़े जमाकर उन्हें पढ़ा जाता। इनके अतिरिक्त एक और मार्ग यह था कि किसी
अधिकारी के मुख से गलती से अथवा सहानुभूतिवश कोई समाचार निकल जाता। इस मार्ग से कभी-कभी स्वयं बारी साहब भी संवाददाता का काम कर देते थे। परंतु उनका वरदान नित्य ही अभिशापगर्भित होता था। बारी साहब ऐसे समाचार लेकर स्वयं हमारे पास मानो उपकार करने पधारते,