उनमें से कई जन मेरे इस निराशाजनक, दुःखी भविष्य कथन पर क्रुद्व भी होते थे। पुनः कइयों का विश्वास अरविंद बाबू की एक भविष्यवाणी का आश्रय लिये हुए था। अरविंद बाबू को जब मुक्ति मिली थी तब उनकी ओर जिन्हें उनके साथ कठोर कारावास तथा द्वीपांतर के आजन्म दंड हो गए थे, मुड़कर अभियुक्त के पिंजरे से बाहर निकलते-निकलते उन्हांेने कहा था, ‘‘जाओ युवक, तुम्हें आज मुक्ति नहीं मिली, चिंता नहीं; तीन वर्षों के अंदर-अंदर ही तुम सब वापस लौटोगे!’’
उनमें से कई जन मेरे इस निराशाजनक, दुःखी भविष्य कथन पर क्रुद्व भी होते थे। पुनः कइयों का विश्वास अरविंद बाबू की एक भविष्यवाणी का आश्रय लिये हुए था। अरविंद बाबू को जब मुक्ति मिली थी तब उनकी ओर जिन्हें उनके साथ कठोर कारावास तथा द्वीपांतर के आजन्म दंड हो गए थे, मुड़कर अभियुक्त के पिंजरे से बाहर निकलते-निकलते उन्हांेने कहा था, ‘‘जाओ युवक, तुम्हें आज मुक्ति नहीं मिली, चिंता नहीं; तीन वर्षों के अंदर-अंदर ही तुम सब वापस लौटोगे!’’