चाहिए तथापि वृथा आस रखने से न रखना ही कर्मयोगा मार्ग में अधिक श्रेयस्कर है, बल्कि वह अधिक सुखकर भी होता है। अतः यही आस मन में संजोए रखना कि हमें यहीं पर यह कष्ट उस काल तक, जब तक निश्चित अवधि कथन करना असंभव है, सहना पड़ेगा। तद्नुरूप मन को तैयार करो, यही मैं अपने राजनीतिक सहतापियों को बार-बार कहता रहा। परंतु किसी भी तरह से उनकी उत्कंठा तथा यह विचार कि हम अब अवश्य मुक्त होंगे। रत्ती भर भी कम नहीं हो रहा था। जैसाकि ऊपर वर्णन किया है,
चाहिए तथापि वृथा आस रखने से न रखना ही कर्मयोगा मार्ग में अधिक श्रेयस्कर है, बल्कि वह अधिक सुखकर भी होता है। अतः यही आस मन में संजोए रखना कि हमें यहीं पर यह कष्ट उस काल तक, जब तक निश्चित अवधि कथन करना असंभव है, सहना पड़ेगा। तद्नुरूप मन को तैयार करो, यही मैं अपने राजनीतिक सहतापियों को बार-बार कहता रहा। परंतु किसी भी तरह से उनकी उत्कंठा तथा यह विचार कि हम अब अवश्य मुक्त होंगे। रत्ती भर भी कम नहीं हो रहा था। जैसाकि ऊपर वर्णन किया है,