होंगे। सभी का यही निश्चय हो गया। प्रश्न बस इतना ही रह गया कि अरविंद बाबू की भविष्यवाणी के वे तीन-चार वर्ष कहां से गिने जाएं? अनेक मीमांसकों की सूक्ष्म समन्वय पद्वति का बार-बार अवलंबन करके अंत में यह निश्चित
किया कि वही सत्य है जो अनुकूल है। उस दिसंबर में ही वह भविष्यवाणी फलित होगी और वह राज्यारोहण का अलौकिक प्रसंग भी आया हुआ था, निश्चित ही हम सभी मुक्त होंगे। कितनी उत्कंठा थी मुक्ति की! ठसलिए कि जिन प्रियकर जनों के दर्शन से सदा के लिए वंचित होना पड़ेगा,
होंगे। सभी का यही निश्चय हो गया। प्रश्न बस इतना ही रह गया कि अरविंद बाबू की भविष्यवाणी के वे तीन-चार वर्ष कहां से गिने जाएं? अनेक मीमांसकों की सूक्ष्म समन्वय पद्वति का बार-बार अवलंबन करके अंत में यह निश्चित
किया कि वही सत्य है जो अनुकूल है। उस दिसंबर में ही वह भविष्यवाणी फलित होगी और वह राज्यारोहण का अलौकिक प्रसंग भी आया हुआ था, निश्चित ही हम सभी मुक्त होंगे। कितनी उत्कंठा थी मुक्ति की! ठसलिए कि जिन प्रियकर जनों के दर्शन से सदा के लिए वंचित होना पड़ेगा,