ऐसा मानकर मन तड़पता था, उनके प्रियमुख कमल पर काल की कठोर नई सिलवट पड़ने से पहले ज्यों-की-त्यों हम एक-दो वर्षों की अवधि में वापस लौटकर देख सकेंगे। एक-दूसरे के घर जाकर अपने इस अंदमान के कठोर अत्याचारों की दुःखद कहानियां पारिवारिक स्नेह की सुखद गोदी में लेटकर एक-दूसरे से कहेंगे। बस फिर देरी किस बात की। बंगालियों को महाराष्ट्रियों ने आमंत्रित किया, पंजाबियों ने भी महाराष्ट्रियों को आमंत्रण दे डाले।
अर्थात् मुझे भी निमंत्रण
ऐसा मानकर मन तड़पता था, उनके प्रियमुख कमल पर काल की कठोर नई सिलवट पड़ने से पहले ज्यों-की-त्यों हम एक-दो वर्षों की अवधि में वापस लौटकर देख सकेंगे। एक-दूसरे के घर जाकर अपने इस अंदमान के कठोर अत्याचारों की दुःखद कहानियां पारिवारिक स्नेह की सुखद गोदी में लेटकर एक-दूसरे से कहेंगे। बस फिर देरी किस बात की। बंगालियों को महाराष्ट्रियों ने आमंत्रित किया, पंजाबियों ने भी महाराष्ट्रियों को आमंत्रण दे डाले।
अर्थात् मुझे भी निमंत्रण