प्राप्त हो गया। उन राजबंदियों में से मेरे कक्ष में जिन्हें रखा गया था, वे सारे मेरे इर्दगिर्द इकट्ठे होते और सर्वथा निश्छल हर्ष से उत्तरी तथा बंगला उच्चारण में तात्या कहते हुए अनुरोध करते, ‘तात्या, आप जाओगे, तब हमारे देश में अवश्य आएंगे।’ कहते हुए वे उदारचरित नवयुवक मेरी मुक्ति संबंधी निराशा दूर करने का हार्दिक प्रयास करते। सत्य ही उन सभी का मेरा पचास वर्षीय दंड सुनकर कलेजा इतना फट जाता कि उस मुक्ति से अधिक जो उस उत्सव की खुशी होनेवाली थी,
प्राप्त हो गया। उन राजबंदियों में से मेरे कक्ष में जिन्हें रखा गया था, वे सारे मेरे इर्दगिर्द इकट्ठे होते और सर्वथा निश्छल हर्ष से उत्तरी तथा बंगला उच्चारण में तात्या कहते हुए अनुरोध करते, ‘तात्या, आप जाओगे, तब हमारे देश में अवश्य आएंगे।’ कहते हुए वे उदारचरित नवयुवक मेरी मुक्ति संबंधी निराशा दूर करने का हार्दिक प्रयास करते। सत्य ही उन सभी का मेरा पचास वर्षीय दंड सुनकर कलेजा इतना फट जाता कि उस मुक्ति से अधिक जो उस उत्सव की खुशी होनेवाली थी,