मेरी मुक्ति के लिए वे आनंदित हो रहे थे।
उत्सव समीप आ गया। अफसरों की तो कोई सीमा ही नहीं रही। अंदमान के अधिकारियों ने जिधर देखो उधर चकाचक सफाई कराना आरंभ किया। प्रत्येक बंदी समझने लगा, मैं तो अवश्य मुक्त हो जाऊंगा।
कल राज्यरोहण दिवस है। अतः रह जगह यही अफवाह थी कि राजबंदियों को मुक्त करने की आज्ञा आ भी चुकी है। सत्ताधारियों की भी यही धारणा थी कि ये अवश्य मुक्त होंगे। बाद में हमें पता चला कि सचमुच ही भीतर-ही भीतर कुछ
मेरी मुक्ति के लिए वे आनंदित हो रहे थे।
उत्सव समीप आ गया। अफसरों की तो कोई सीमा ही नहीं रही। अंदमान के अधिकारियों ने जिधर देखो उधर चकाचक सफाई कराना आरंभ किया। प्रत्येक बंदी समझने लगा, मैं तो अवश्य मुक्त हो जाऊंगा।
कल राज्यरोहण दिवस है। अतः रह जगह यही अफवाह थी कि राजबंदियों को मुक्त करने की आज्ञा आ भी चुकी है। सत्ताधारियों की भी यही धारणा थी कि ये अवश्य मुक्त होंगे। बाद में हमें पता चला कि सचमुच ही भीतर-ही भीतर कुछ