मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

खिचड़ी पक रही थी। राज्यरोहण समारोह की यह पूर्वसंध्या थी। हम सारे बंदी भोजनादि से निवृत्त होकर एक पंक्ति में बैठे थे। मेरे सह-कष्टभोगी राजबंदी भी मेरे निकट ही बैठ गए, क्योंकि उस हर्ष की गड़बड़ी में जमादार भी व्यस्त था। वह भी कल मुक्त होगा ही होगा। बस, यह निश्चित करना बाकी था कि किस गाड़ी से कलकत्ता से आगे निकल पडे़ं। इतने में ं ं खान हांफता हुआ आ गया और मेरा हाथ बलपूर्वक दबाते हुए कहने लगा, ‘‘बालिस्टर बाबू, आप का Ûोत, जिन


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खिचड़ी पक रही थी। राज्यरोहण समारोह की यह पूर्वसंध्या थी। हम सारे बंदी भोजनादि से निवृत्त होकर एक पंक्ति में बैठे थे। मेरे सह-कष्टभोगी राजबंदी भी मेरे निकट ही बैठ गए, क्योंकि उस हर्ष की गड़बड़ी में जमादार भी व्यस्त था। वह भी कल मुक्त होगा ही होगा। बस, यह निश्चित करना बाकी था कि किस गाड़ी से कलकत्ता से आगे निकल पडे़ं। इतने में ं ं खान हांफता हुआ आ गया और मेरा हाथ बलपूर्वक दबाते हुए कहने लगा, ‘‘बालिस्टर बाबू, आप का Ûोत, जिन


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