थे। उन्हें बताया गया कि ‘आपको दंड के हर वर्ष के पीछे कुछ महीने की छूट मिल गई है।’ इस हिसाब से मुझे मचास महीने दंड से छूट मिलनी चाहिए थी, परंतु मुझे बताया गया कि आपके लिए न मुक्ति है न ही छूट।
अन्य साधारण बंदियों को भी वर्ष के पीछे एक महीना छूट मिली। इसके अतिरिक्त उत्सव में सभी बंदियों को आलू-पुलाव की दावत देने की एक विशेष कृपा की गई। हां, इस विशेष कृपा के लिए मैं भी सत्पात्र बना। इस प्रकार मुक्ति अथवा छूट न मिलकर जाॅर्ज
थे। उन्हें बताया गया कि ‘आपको दंड के हर वर्ष के पीछे कुछ महीने की छूट मिल गई है।’ इस हिसाब से मुझे मचास महीने दंड से छूट मिलनी चाहिए थी, परंतु मुझे बताया गया कि आपके लिए न मुक्ति है न ही छूट।
अन्य साधारण बंदियों को भी वर्ष के पीछे एक महीना छूट मिली। इसके अतिरिक्त उत्सव में सभी बंदियों को आलू-पुलाव की दावत देने की एक विशेष कृपा की गई। हां, इस विशेष कृपा के लिए मैं भी सत्पात्र बना। इस प्रकार मुक्ति अथवा छूट न मिलकर जाॅर्ज