महाराज के राज्यारोहण समारोह के लिए हमें मिला-आलू-पुलाव और बिल्ला तोड़ने का दंड। हम इसी में किंचित् संतोष मान लें, इसीलिए संध्या समय बारी साहब ने हमारे भोजन के समय बताया, ‘‘मेरे जैसे बंदी को, जो पूरे अंदमान में
अधिकतम दंड भुगत रहा है, एक दिन की भी छूट न मिलने के कारण उसे व्यक्तिगत रूप से बड़ा खेद है, तथापि आप जैसे भयंकर क्रांतिकारी को जब तक उसका वैमनस्य, गुस्सा रंचमात्र भी कम नहीं होता तब तक इतनी सी भी छूट न देना सरकार
महाराज के राज्यारोहण समारोह के लिए हमें मिला-आलू-पुलाव और बिल्ला तोड़ने का दंड। हम इसी में किंचित् संतोष मान लें, इसीलिए संध्या समय बारी साहब ने हमारे भोजन के समय बताया, ‘‘मेरे जैसे बंदी को, जो पूरे अंदमान में
अधिकतम दंड भुगत रहा है, एक दिन की भी छूट न मिलने के कारण उसे व्यक्तिगत रूप से बड़ा खेद है, तथापि आप जैसे भयंकर क्रांतिकारी को जब तक उसका वैमनस्य, गुस्सा रंचमात्र भी कम नहीं होता तब तक इतनी सी भी छूट न देना सरकार