मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

की सहूलियतों के लिए सर्वथा अपात्र हूं। वास्तव में यह आलू-पुलाव भी मुझे तब तक नहीं मिलना चाहिए जब तक मेरा गुस्सा कम नहीं हो जाता। इसे भी आप वापस ले जाइए।’’

किसी भी राजबंदी को मुक्त न करते हुए और मुझे तो एक दिन की भी छूट न देते हुए सन् 1911 का वह राज्यारोहण समारोह समाप्त हो गया। उस दिन प्रातःकाल के समय राजबंदी जब कोठरियों से निकले थे, तब उनमें से अनेक के मन में दृढ़ विश्वास था कि आज संध्या समय ही वे पुनः अपनी कोठरियों


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की सहूलियतों के लिए सर्वथा अपात्र हूं। वास्तव में यह आलू-पुलाव भी मुझे तब तक नहीं मिलना चाहिए जब तक मेरा गुस्सा कम नहीं हो जाता। इसे भी आप वापस ले जाइए।’’

किसी भी राजबंदी को मुक्त न करते हुए और मुझे तो एक दिन की भी छूट न देते हुए सन् 1911 का वह राज्यारोहण समारोह समाप्त हो गया। उस दिन प्रातःकाल के समय राजबंदी जब कोठरियों से निकले थे, तब उनमें से अनेक के मन में दृढ़ विश्वास था कि आज संध्या समय ही वे पुनः अपनी कोठरियों


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