में बंद नहीं होंगे आज संध्या होने से पहले ही इस उत्सव के उपलक्ष्य में उनकी मुक्ति होती और वे जहाज की प्रतीक्षा में बंदीशाला के बाहर कहीं होंगे। परंतु शाम होते ही पुनः उस कोठरी का मुंह देखकर उसके जबडे़ में अपने आपको दफनाने के लिए उन्हें पुनः भीतर घुसना पड़ा। बंदीगृह में ऐसी कुछ भयानक उदास घड़ियां, जो सभी के मुख पर निराशा की काली-कलूटी छाया फेलाती हैं, मुझे स्मरण हैं। उनमें उस शाम की वेला और वह एक रात भी एक थी।
मुक्ति का
में बंद नहीं होंगे आज संध्या होने से पहले ही इस उत्सव के उपलक्ष्य में उनकी मुक्ति होती और वे जहाज की प्रतीक्षा में बंदीशाला के बाहर कहीं होंगे। परंतु शाम होते ही पुनः उस कोठरी का मुंह देखकर उसके जबडे़ में अपने आपको दफनाने के लिए उन्हें पुनः भीतर घुसना पड़ा। बंदीगृह में ऐसी कुछ भयानक उदास घड़ियां, जो सभी के मुख पर निराशा की काली-कलूटी छाया फेलाती हैं, मुझे स्मरण हैं। उनमें उस शाम की वेला और वह एक रात भी एक थी।
मुक्ति का