भी मैं टोह लेने का प्रयास कर रहा था। जैसाकि पहले कहा था कि बंदीगृह के बाहर जो थोड़े-बहुत राजबंदी भेजे गए और जिन्हें उस उपनिवेश के विभिन्न विभागों में काम में लगाया गया था, उन्हें बीमार हो जाने पर बाहर के रूग्णालय में नहीं रखा जाता था, क्यांेकि वहां रहनेवाले बंदी अत्यधिक स्वतंत्रतापूर्वक एक-दूसरे से मिल सकते थे और उनके खान-पान का प्रबंध भी बंदीगृह के रूग्णालय से स्वाभाविक रूप में अधिक अच्छा रहता था।
इस स्वाभाविक भय से
भी मैं टोह लेने का प्रयास कर रहा था। जैसाकि पहले कहा था कि बंदीगृह के बाहर जो थोड़े-बहुत राजबंदी भेजे गए और जिन्हें उस उपनिवेश के विभिन्न विभागों में काम में लगाया गया था, उन्हें बीमार हो जाने पर बाहर के रूग्णालय में नहीं रखा जाता था, क्यांेकि वहां रहनेवाले बंदी अत्यधिक स्वतंत्रतापूर्वक एक-दूसरे से मिल सकते थे और उनके खान-पान का प्रबंध भी बंदीगृह के रूग्णालय से स्वाभाविक रूप में अधिक अच्छा रहता था।
इस स्वाभाविक भय से