साथ-साथ ही यथासंभव समाचार प्राप्त करके भीतर आ जाता। बाहर अखबार अधिक सुलभता से गुपचुप पढ़ने के लिए मिल जाते। बाहर गए हुए राजबंदियों में से जिसे समाचार मिल जाता, उसे प्रायः तुरंत कोई-न-कोई बीमारी होती और उसे बंदीशाला के रूग्णालय में बंद होने के लिए भेजा जाता। राज्यारोहण के कारण स्वदेश में क्या हुआ, यह समाचार खोजने में लगे बाहर के सारे राजबंदियों में से एक को अकस्मात् समाचार का रोग लग गया। बीमार बंदियों में वह भी घुल-मिल
साथ-साथ ही यथासंभव समाचार प्राप्त करके भीतर आ जाता। बाहर अखबार अधिक सुलभता से गुपचुप पढ़ने के लिए मिल जाते। बाहर गए हुए राजबंदियों में से जिसे समाचार मिल जाता, उसे प्रायः तुरंत कोई-न-कोई बीमारी होती और उसे बंदीशाला के रूग्णालय में बंद होने के लिए भेजा जाता। राज्यारोहण के कारण स्वदेश में क्या हुआ, यह समाचार खोजने में लगे बाहर के सारे राजबंदियों में से एक को अकस्मात् समाचार का रोग लग गया। बीमार बंदियों में वह भी घुल-मिल