के चलते अर्थात् सन् 1911 के अंत और 1912 के प्रारंभ में अंदमान के बंदीगृह में मुझे लगभग एक वर्ष हो गया। इस पूरे वर्ष में कठोर परिश्रम को झेलने तथा बंदीशाला का अन्न खाने के बाद भी मेरा स्वास्थ्य साधारणतया ठीक ही रहा। बंदीगृह का यह भोजन कैसा होता है, एक वर्ष का अनुभव प्राप्त करने के बाद इसकी साधारण परिकल्पना देने में अब कोई आपत्तिा नहीं है।
बंदियों का भोजन
पुस्तक (जेल नियमावली) में निर्धारित नियमों को देखा जाए तो इस
के चलते अर्थात् सन् 1911 के अंत और 1912 के प्रारंभ में अंदमान के बंदीगृह में मुझे लगभग एक वर्ष हो गया। इस पूरे वर्ष में कठोर परिश्रम को झेलने तथा बंदीशाला का अन्न खाने के बाद भी मेरा स्वास्थ्य साधारणतया ठीक ही रहा। बंदीगृह का यह भोजन कैसा होता है, एक वर्ष का अनुभव प्राप्त करने के बाद इसकी साधारण परिकल्पना देने में अब कोई आपत्तिा नहीं है।
बंदियों का भोजन
पुस्तक (जेल नियमावली) में निर्धारित नियमों को देखा जाए तो इस