भोजन की मात्रा सरसरी तौर पर अपर्याप्त नहीं होती। अंदमान में सभी राज्यों के विभिन्न जातीय लोगों के आने के कारण कटोरा भर चावल और गेंहू की दो रोटियां- इतना भोजन, जो कि मिश्र पद्वति का था, वह ठीक ही था। यह मात्रा अधिक बढ़ाने की अनुमति दे दी जाती और इस प्रकार किसी प्रतिवाद की गुंजाइश ही नहीं रहती कि भोजन पर्याप्त नहीं होता। बंदियों में ऐसे कुछ लोग होते थे जिनकी भूख इस अन्न मात्रा से पहले नहीं मिटती थी। परंतु प्रायः एक-दो वर्षों
भोजन की मात्रा सरसरी तौर पर अपर्याप्त नहीं होती। अंदमान में सभी राज्यों के विभिन्न जातीय लोगों के आने के कारण कटोरा भर चावल और गेंहू की दो रोटियां- इतना भोजन, जो कि मिश्र पद्वति का था, वह ठीक ही था। यह मात्रा अधिक बढ़ाने की अनुमति दे दी जाती और इस प्रकार किसी प्रतिवाद की गुंजाइश ही नहीं रहती कि भोजन पर्याप्त नहीं होता। बंदियों में ऐसे कुछ लोग होते थे जिनकी भूख इस अन्न मात्रा से पहले नहीं मिटती थी। परंतु प्रायः एक-दो वर्षों