उनपर झूठमूठ के अभियोग लगाने आदि हथकंडों द्वारा ये वाॅर्डर उन्हें तंग करते। इस तरह तंग करनेवाले निन्यानवें प्रतिशत पठान, पंजाबी और सिंधी मुसलमान होते और वे अपने किए हुए अन्याय की जानकारी ऊपर तक न पहुंचने देने की सावधानी बरतते। वहां के नीच, अधम-से-अधम मुसलमानों में भी हिंदुओं से विद्वेष रखना एक धार्मिक कर्तव्य भावना होता था। अतः जिन्हें इस तरह की यंत्रनाएं सहनी पड़ती, उनमें निन्यानवें प्रतिशत हिंदु बंदीवान ही होते।
इन वाॅर्डरों को जेल में ही भोजन करना पड़ता,
उनपर झूठमूठ के अभियोग लगाने आदि हथकंडों द्वारा ये वाॅर्डर उन्हें तंग करते। इस तरह तंग करनेवाले निन्यानवें प्रतिशत पठान, पंजाबी और सिंधी मुसलमान होते और वे अपने किए हुए अन्याय की जानकारी ऊपर तक न पहुंचने देने की सावधानी बरतते। वहां के नीच, अधम-से-अधम मुसलमानों में भी हिंदुओं से विद्वेष रखना एक धार्मिक कर्तव्य भावना होता था। अतः जिन्हें इस तरह की यंत्रनाएं सहनी पड़ती, उनमें निन्यानवें प्रतिशत हिंदु बंदीवान ही होते।
इन वाॅर्डरों को जेल में ही भोजन करना पड़ता,