मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

तरह का दलिया हम नहीं खाएंगे। फिर यह मामला बारी तक पहुंचा तो वे भीतर आ गए। हमारे निकट के बंदियों से उन्होंने दो-टूक उत्तर दिया-‘‘नहीं साहब! बड़ा बाबू झूठ बोलता है।’’ तब गुस्से से भरकर बारी ने मुझसे कहा, ‘‘इन सभी को दलिए में कहीं भी मिट्टी के तेल की बू नहीं आ रही, तम्हीं को आ रही है। ठहरो, झूठमूठ की चुगली खाने पर तुमपर अभियोग चलाता हूं।’’ इस प्रकार शोर-शराबा करके वह चलता बना और सभी कैदियों को मिट्टी का तेल पड़ा वही दलिया गले से उतारना पड़ा। क्योंकि एक तो,


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तरह का दलिया हम नहीं खाएंगे। फिर यह मामला बारी तक पहुंचा तो वे भीतर आ गए। हमारे निकट के बंदियों से उन्होंने दो-टूक उत्तर दिया-‘‘नहीं साहब! बड़ा बाबू झूठ बोलता है।’’ तब गुस्से से भरकर बारी ने मुझसे कहा, ‘‘इन सभी को दलिए में कहीं भी मिट्टी के तेल की बू नहीं आ रही, तम्हीं को आ रही है। ठहरो, झूठमूठ की चुगली खाने पर तुमपर अभियोग चलाता हूं।’’ इस प्रकार शोर-शराबा करके वह चलता बना और सभी कैदियों को मिट्टी का तेल पड़ा वही दलिया गले से उतारना पड़ा। क्योंकि एक तो,


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