भूखे पेट को दूसरा मिलेगा नहीं और फिर भूखे पेट ही काम करना पड़ेगा। दूसरा उससे भी महत्तवपूर्ण कारण था और वह यह
कि साधारण नियमानुसार कारागृह में परोसा हुआ खाना अनिवार्य था। उसे फंेकना नहीं चाहिए। किसी के लिए कम-से-कम हो तो अधिक मिलेगा। अधिक हो तो फंेका नहीं जा सकेगा। साधारण तौर पर निश्चित मात्रा खानी ही पड़ेगी। निर्बल और बलवान के लिए जो एक औसत मात्रा निर्धारित है उसके अनुसार अन्न ग्रहण करते हुए औसत तौर पर जीना चाहिए। वास्तव
भूखे पेट को दूसरा मिलेगा नहीं और फिर भूखे पेट ही काम करना पड़ेगा। दूसरा उससे भी महत्तवपूर्ण कारण था और वह यह
कि साधारण नियमानुसार कारागृह में परोसा हुआ खाना अनिवार्य था। उसे फंेकना नहीं चाहिए। किसी के लिए कम-से-कम हो तो अधिक मिलेगा। अधिक हो तो फंेका नहीं जा सकेगा। साधारण तौर पर निश्चित मात्रा खानी ही पड़ेगी। निर्बल और बलवान के लिए जो एक औसत मात्रा निर्धारित है उसके अनुसार अन्न ग्रहण करते हुए औसत तौर पर जीना चाहिए। वास्तव