में ऐसा नहीं था कि इस प्रकार कि नियमों का अमल हमेशा सख्ती के साथ होता। परंतु पूर्व में जब इस तरह की कठोरता बार-बार की जाती अथवा आजकल भी की जाती है तब उसका अनिवार्यतः बंदियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। यदि किसी को सचमुच ही जिस भोजन की आवश्यकता न हो और उसने वह भोजन जूठन की टोकरी में फेंक दिया हो, तो किसी अधिकारी द्वारा उससे बलपूर्वक उठवाकर उस बंदी को ही खाने के लिए बाध्य करने के भी उदाहरण देखे थे। उस दिन वह मिट्टी
में ऐसा नहीं था कि इस प्रकार कि नियमों का अमल हमेशा सख्ती के साथ होता। परंतु पूर्व में जब इस तरह की कठोरता बार-बार की जाती अथवा आजकल भी की जाती है तब उसका अनिवार्यतः बंदियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। यदि किसी को सचमुच ही जिस भोजन की आवश्यकता न हो और उसने वह भोजन जूठन की टोकरी में फेंक दिया हो, तो किसी अधिकारी द्वारा उससे बलपूर्वक उठवाकर उस बंदी को ही खाने के लिए बाध्य करने के भी उदाहरण देखे थे। उस दिन वह मिट्टी