एक बार किसी राजबंदी ने उस दलिए को पकड़ा, जिसमें मिट्टी का तेल गिरा हुआ था। उसने उस दलिए का सवेन करने से साफ इन्कार किया तो अन्य दो-चार बंदियों ने भी जो उस कक्ष में ोि, दलिए का सेवन करना छोड़ दिया। यह देखते ही कुछ साधारण बंदी भी उनमें शामिल हो गए। करते-करते बारी आए और उस उत्तर हिंदूस्थानी राजबंदी को डपटकर बोले, ‘‘झूठ बोलकर तुम बंदियों की टोली को बहका रहे हो। देखो, तुम लोगों में से ही अक्लमंद तथा समझदार सज्जन कैसे कांजी
एक बार किसी राजबंदी ने उस दलिए को पकड़ा, जिसमें मिट्टी का तेल गिरा हुआ था। उसने उस दलिए का सवेन करने से साफ इन्कार किया तो अन्य दो-चार बंदियों ने भी जो उस कक्ष में ोि, दलिए का सेवन करना छोड़ दिया। यह देखते ही कुछ साधारण बंदी भी उनमें शामिल हो गए। करते-करते बारी आए और उस उत्तर हिंदूस्थानी राजबंदी को डपटकर बोले, ‘‘झूठ बोलकर तुम बंदियों की टोली को बहका रहे हो। देखो, तुम लोगों में से ही अक्लमंद तथा समझदार सज्जन कैसे कांजी