से सैकड़ों बंदियों को राजबंदियों का आगमन एक भरी मुसीबत ही प्रतीत होता। यद्यापि उनमें बारी साहब के विरूद्व गवाही देने का साहस नहीं होता, तथापि भीतर से वे राजबंदियों की कृतज्ञ भाव से सहायता ही करते, किंबहुना उनका मनःपूर्वक सहयोग तथा सादर प्रेम का आधार उन्हें नहीं मिलता तो राजबंदियों पर होनेवाले अत्याचारों की कोई सीमा ही नहीं रहती। प्रकट गवाही देने का उनमें साहस नहीं होता था तो सभी राजबंदियों में भी बारी के विरूद्व गवाही देने का साहस नहीं होता था।
से सैकड़ों बंदियों को राजबंदियों का आगमन एक भरी मुसीबत ही प्रतीत होता। यद्यापि उनमें बारी साहब के विरूद्व गवाही देने का साहस नहीं होता, तथापि भीतर से वे राजबंदियों की कृतज्ञ भाव से सहायता ही करते, किंबहुना उनका मनःपूर्वक सहयोग तथा सादर प्रेम का आधार उन्हें नहीं मिलता तो राजबंदियों पर होनेवाले अत्याचारों की कोई सीमा ही नहीं रहती। प्रकट गवाही देने का उनमें साहस नहीं होता था तो सभी राजबंदियों में भी बारी के विरूद्व गवाही देने का साहस नहीं होता था।