में एक भयंकर जाति का कनखजूरा होता है। इसकी लंबाई डेढ़ फीट होती है और विष इतना तेज कि इसका काटा पानी भी नहीं मांगता। प्रातःकाल के समय बंदियों की एक टोली बंदीगृह के लिए सब्जी लेने भेजी जाती थी। उस इलाके में जंगल के और रास्तों के वीरान स्थानों पर अरवी भरपूर मात्रा में उगती है। उसमें कुछ साग भी उगता है। वह टोली हाथों में बड़े-बडे़ हंसिये लिए वह साग काटती जाती और उस कटे हुए साग के ढेर-के-ढेर रचकर उन्हें गाड़ी में भरकर बंदीगृह
में एक भयंकर जाति का कनखजूरा होता है। इसकी लंबाई डेढ़ फीट होती है और विष इतना तेज कि इसका काटा पानी भी नहीं मांगता। प्रातःकाल के समय बंदियों की एक टोली बंदीगृह के लिए सब्जी लेने भेजी जाती थी। उस इलाके में जंगल के और रास्तों के वीरान स्थानों पर अरवी भरपूर मात्रा में उगती है। उसमें कुछ साग भी उगता है। वह टोली हाथों में बड़े-बडे़ हंसिये लिए वह साग काटती जाती और उस कटे हुए साग के ढेर-के-ढेर रचकर उन्हें गाड़ी में भरकर बंदीगृह