पहुंचने पर वे भी उनकी हां में हां मिलाते हुए अपना रास्ता नापते। आखिर निरूपाय होकर कनखजूरा अथवा सांप का टुकड़ा फंेककर शेष सब्जी अपने गले में उतारनी पड़ती। अन्यथा रूखा भोजन कैसे करें? उसपर न खाने से काम में छूट थोड़ी ही मिलेगी? फिर इतना कठोर परिश्रम का काम किसके बलबूते पर करें? बारी यह भलीभांति जानते थे, अतः वे अथवा अन्य कोई भी अधिकारी उधर ध्यान नहीं देते। कभी-कभी मेरे और मेरे जैसे अन्य राजबंदियों के प्रतिवाद के परिणामस्वरूप
पहुंचने पर वे भी उनकी हां में हां मिलाते हुए अपना रास्ता नापते। आखिर निरूपाय होकर कनखजूरा अथवा सांप का टुकड़ा फंेककर शेष सब्जी अपने गले में उतारनी पड़ती। अन्यथा रूखा भोजन कैसे करें? उसपर न खाने से काम में छूट थोड़ी ही मिलेगी? फिर इतना कठोर परिश्रम का काम किसके बलबूते पर करें? बारी यह भलीभांति जानते थे, अतः वे अथवा अन्य कोई भी अधिकारी उधर ध्यान नहीं देते। कभी-कभी मेरे और मेरे जैसे अन्य राजबंदियों के प्रतिवाद के परिणामस्वरूप