बारी को थोड़ा-बहुत धब्बा लग ही जाता। ऐसे ही एक अवसर पर कनखजूरे के इस प्रसंग को लेकर बारी मुझे शांत करने के लिए पुचकारते हुए कहने लगे, ‘‘व्ी! डतण् ैंअंतांतए कवदश्ज लवन जीपदा उनबी व िजीमेम ेबवनदकतमसेण्’’ (अजी सावरकर, इन बदमाशों का विचार छोड़ दीजिए)। आपकी समाज में जो ऊंची स्थिति है, मैं जानता हूं। यह देखिए। परंतु इन सारे बंदियों के सामने आप भोजन की खामियां उजागर मत कीजिए। वे चैपाए हैं। देखते-देखते मेरे सिर पर चढ़ बैठेंगे। अब
बारी को थोड़ा-बहुत धब्बा लग ही जाता। ऐसे ही एक अवसर पर कनखजूरे के इस प्रसंग को लेकर बारी मुझे शांत करने के लिए पुचकारते हुए कहने लगे, ‘‘व्ी! डतण् ैंअंतांतए कवदश्ज लवन जीपदा उनबी व िजीमेम ेबवनदकतमसेण्’’ (अजी सावरकर, इन बदमाशों का विचार छोड़ दीजिए)। आपकी समाज में जो ऊंची स्थिति है, मैं जानता हूं। यह देखिए। परंतु इन सारे बंदियों के सामने आप भोजन की खामियां उजागर मत कीजिए। वे चैपाए हैं। देखते-देखते मेरे सिर पर चढ़ बैठेंगे। अब